आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वहाँ संपर्क(Connectivity) तो 5G की रफ़्तार से बढ़ रहा है, लेकिन इंसानी रिश्तों का नेटवर्क लगातार कमज़ोर होता जा रहा है। फेसबुक पर पांच हज़ार दोस्त हैं, इंस्टाग्राम पर हज़ारों फॉलोअर्स हैं और व्हाट्सएप पर चौबीसों घंटे ग्रुप्स में मैसेज कड़कड़ाते रहते हैं। लेकिन जब रात को आँखें बंद होती हैं या जब दिल किसी भारी बोझ से दबता है, तब मोबाइल की उस चमकती हुई स्क्रीन के पीछे सिर्फ एक चीज़ मिलती है— अकेलापन।’दीप्तांश की कलम’ से आज की इस आभासी (Virtual) दुनिया की कड़वी सच्चाई को बयां करती हुई कुछ बेहद भावुक लाइनें और शायरियां पेश हैं, जिन्हें आज का हर इंसान महसूस कर रहा है।
1. डिजिटल महफ़िल का छलावा
आज हमारी खुशियां और गम सिर्फ स्टेटस और रील्स तक सीमित होकर रह गए हैं। इस झूठी चमक पर यह दो लाइनें सीधे दिल पर दस्तक देती हैं:
हज़ारों दोस्त हैं सोशल मीडिया की इस महफ़िल में जनाब,
मगर जब दिल उदास हो, तो कोई हाल पूछने वाला नहीं होता।
2. स्क्रीन की रोशनी और मन का अंधेरा
हम दिन भर दूसरों की प्रोफाइल देखकर अपनी ज़िंदगी की तुलना करते रहते हैं, जिससे मन में एक अनजाना सूनापन घर कर जाता है
चमकती स्क्रीन पर दूसरों की खुशियां ढूंढते रहे रात भर,
जब खुद की तरफ देखा, तो तन्हाई के सिवा कुछ न मिला उम्र भर।
सस्ते हो गए हैं डेटा पैक्स, पर जज़्बात महंगे हो गए हैं,
पास बैठे इंसानों से फासले, और मीलों दूर वाले गहरे हो गए हैं।
ऑनलाइन तो वो आज भी रहते हैं किसी और के लिए,
हमारी चैट तो बस एक पुराना आर्काइव (Archive) बनकर रह गई।
Deeptansh ki kalam se
